लक्ष्मी जी की रोचक कहानी
प्राचीन समय की बात है। जब संसार में चारों ओर अंधकार, दरिद्रता और दुःख फैला हुआ था। तब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन करने का निश्चय किया, ताकि अमृत और अन्य दिव्य रत्न प्राप्त किए जा सकें।
समुद्र मंथन के दौरान बहुत सारी अद्भुत चीज़ें निकलीं — हलाहल विष, ऐरावत हाथी, कामधेनु गाय, और अंत में देवी लक्ष्मी प्रकट हुईं। जैसे ही देवी लक्ष्मी प्रकट हुईं, चारों ओर प्रकाश फैल गया, और दरिद्रता समाप्त होने लगी।
देवी लक्ष्मी सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजी थीं। उनके हाथ में कमल था और वे कमल पर ही विराजमान थीं। सभी देवता, ऋषि और मुनि उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। लक्ष्मी जी ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया और उनके वक्षस्थल पर निवास करने लगीं।
देवी लक्ष्मी को धन, वैभव, समृद्धि और शुभता की देवी माना जाता है। वह जिस घर में सच्चे मन से पूजा जाती हैं, वहां कभी दरिद्रता नहीं आती। दीपावली की रात विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन के लिए होती है। माना जाता है कि उस दिन लक्ष्मी जी धरती पर भ्रमण करती हैं और जहां साफ-सफाई, श्रद्धा और प्रेम होता है, वहां निवास करती हैं।
लक्ष्मी जी का संदेश
देवी लक्ष्मी हमें यह सिखाती हैं कि केवल धन कमाना ही नहीं, बल्कि उसे धर्मपूर्वक अर्जित करना, उसका सदुपयोग करना और दूसरों के साथ साझा करना भी जरूरी है।
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